सुप्रभात !
आशा है आप स्वस्थ व सुरक्षित होंगे।
प्रधानाचार्य के आदेश अनुसार आपने ID बना ली होगी।
नीचे दिए लिंक की सहायता से संवाद सुनिए :-
https://youtu.be/yr0T5_vyMhs
यह चेहरा तो आप पहचानते हैं। यह ब्यक्ति अपने चेहरे और कलाकारी से अधिक अपने बोलने के अंदाज़ की वजह से लोकप्रिय हुआ। इस बोलने के अंदाज़ को संवाद प्रस्तुति कहते हैं। आज संवाद लेखन के बारे में जानते हैं।
संवाद लेखन
दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच आपसी बातचीत या वार्तालाप को संवाद कहते हैं ।
निरंतर अभ्यास , कल्पनाशीलता तथा अनुभूति के आधार पर संवाद लेखन में विशिष्टता पाई जा सकती है ।
आये यह संवाद सुनें जिसमे युधिष्ठिर यक्ष के प्रश्नों का उतर दे रहे हैं।
https://youtu.be/eD147n0w2BA
आये यह संवाद सुनें जिसमे युधिष्ठिर यक्ष के प्रश्नों का उतर दे रहे हैं।
https://youtu.be/eD147n0w2BA
संवाद -लेखन में निम्नलिखित बातों को ध्यान रखना चाहिए -
* वाक्य छोटे होने चाहिए ।
* संवाद की भाषा सरल , रोचक और स्वाभाविक होनी चाहिए ।
* संवाद विषय और पात्रों के अनुकूल होने चाहिए ।
* संवाद में हास्य - व्यंग्य के साथ-साथ मुहावरेदार भाषा का प्रयोग भी किया जा सकता है ।
*सवांद में समस्या व समाधान (उपाय ) दोनों पर चर्चा होनी चाहिए।
*सवांद में समस्या व समाधान (उपाय ) दोनों पर चर्चा होनी चाहिए।
अंगुलीमाल और बुद्ध का संवाद आपको संवाद लेखन में मदद करेगा।
https://youtu.be/L9B9OdLn5BA
उदाहरण
पिता और पुत्र में वार्तालाप
पिता- बेटे अतुल, कैसा रहा तुम्हारा परीक्षाफल ?
पुत्र- बहुत अच्छा नहीं रहा, पिताजी।
पिता- क्यों ? बताओ तो कितने अंक आए हैं ?
पुत्र- हिन्दी में सत्तर, अंग्रेजी में बासठ, कामर्स में अस्सी, अर्थशास्त्र में बहत्तर......
पिता- अंग्रेजी में इस बार इतने कम अंक क्यों हैं ? कोई प्रश्न छूट गया था ?
पुत्र- पूरा तो नहीं छूटा ..... सबसे अंत में 'ऐस्से' लिखा था, वह अधूरा रह गया।
पिता- तभी तो...... । अलग-अलग प्रश्नों के समय निर्धारित कर लिया करो, तो यह नौबत नहीं आएगी। खैर, गणित तो रह ही गया।
पुत्र- गणित का पर्चा अच्छा नहीं हुआ था। उसमें केवल पचास अंक आए हैं।
पिता- यह तो बहुत खराब बात है। गणित से ही उच्च श्रेणी लाने में सहायता मिलती है।
पुत्र- पता नहीं क्या हुआ, पिताजी। एक प्रश्न तो मुझे आता ही नहीं था। शायद पाठ्यक्रम से बाहर का था।
पिता- एक प्रश्न न करने से इतने कम अंक तो नहीं आने चाहिए।
पुत्र- एक और प्रश्न बहुत कठिन था। उसमें शुरू से ही ऐसी गड़बड़ी हुई कि सारा प्रश्न गलत हो गया।
पिता- अन्य छात्रों की क्या स्थिति है ?
पुत्र- बहुत अच्छे अंक तो किसी के भी नहीं आए पर मुझसे कई छात्र आगे हैं।
पिता- सब अभ्यास की बात है बेटे ! सुना नहीं 'करत करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।' तुम तो स्वयं समझदार हो। अब वार्षिक परीक्षाएँ निकट है। दूरदर्शन और खेल का समय कुछ कम करके उसे पढ़ाई में लगाओ।
पुत्र- जी पिताजी ! मैं कोशिश करूँगा कि अगली बार गणित में पूरे अंक लाऊँ।
पिता- मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है।
सभी कार्य हिंदी साहित्य में करें।
गृह कार्य
माता और पुत्र के बीच पौष्टिक भोजन को लेकर हो रही बात-चीत को संवाद रूप में लिखिए।
