नमस्कार!
पिछली कक्षा में पढ़ा कि टोपी की बहुत पिटाई हुई , उसके अपने मन की सारी बातें इफ़्फ़न को बताई।
अब आगे पढ़ेंगे :- पृष्ठ संख्या - ३९ -३९ -४१
- टोपी बहुत दुखी था। वह इफ़्फ़न से कहता है क्यों न हम दादी बदल लें।
- इफ़्फ़न कहता है कि टोपी की यह इच्छा पूरी नहीं हो सकती। उसके अब्बू यह बात नहीं मानेंगे।
- दोनों बात कर रहे थे कि इफ़्फ़न का नौकर खबर लेकर आया कि इफ़्फ़न की दादी का देहांत हो गया।
- टोपी शाम को इफ़्फ़न के घर गया पर भरा-पूरा घर उसे खाली लग रहा था। जब कि टोपी को दादी का नाम भी नहीं मालूम था।
- टोपी को इफ़्फ़न की दादी से बहुत गहरा संबंध बन गया था।
- दोनों अपने घर में अजनबी भरे घर में अकेले थे क्यों कि दोनों को ही अपने घर में कोई समझने वाला नहीं था।
- दोनों ने एक दूसरे का अकेलापन दूर किया था।
- टोपी ने दस अक्टूबर सन पेंतालिस को कसम खाई कि अब वह किसी भी ऐसे लड़के से कभी भी दोस्ती नहींकरेगा , जिसके पिताजी की बदली होती हो।
- टोपी के जीवन के इतिहास में इस दिन का बहुत महत्त्व है - इसी तारीख को इफ़्फ़न के पिता की बदली मुरादाबाद हो गई थी।
- इफ़्फ़न की दादी के मरने के बाद तो वह अकेला महसूस कर रहा था और इफ़्फ़न के चले जाने पर वह और भी अकेला हो गया।
- दूसरे कलेक्टर के तीनों लड़के टोपी के मित्र नहीं बन सके। उन्होंने उसकी बोली का मज़ाक उड़ाया, अपमान किया।
- टोपी अकेला पड़ गया, घर में उसका दुःख-दर्द कोई नहीं समझता था। घर की नौकरानी सीता ही उसका ध्यान रखती थी। दोनों ही को घर में डांट पड़ती थी।
- जाड़ों के दिनों में मुन्नी बाबू और भैरव के लिए नया कोट आया। टोपी को मुन्नी बाबू का कोट मिला - कोट नया था , पर था तो उतरन। टोपी को यह बात पसंद नहीं आयी, उसने कोट नौकरानी के बेटे को दे दिया।
- टोपी की घर में बहुत पिटाई हुई, उसे पूरा जाड़ा बिना कोट के रहना पड़ा।
कक्षा कार्य
प्रश्न 1 : दादी की मृत्यु के बाद टोपी के अकेलेपन का साथी कौन बना और क्यों ?
प्रश्न 2: टोपी को सरदियाँ बिना कोट के क्यों ग़ुज़ारनी पड़ीं ?
शब्द-अर्थ
दात - बराबरी
पुरसा - सांत्वना देना
एहसास - अनुभूति
तबादला - बदली
गृह कार्य
प्रश्न : 5 ,6, 7, 8 .
प्रश्न 5 - दस अक्तूबर सन पैंतालीस का दिन टोपी के जीवन में क्या महत्त्व रखता है?
उत्तर - दस अक्तूबर सन पैंतालीस का ऐसे तो कोई महत्त्व नहीं है परन्तु टोपी के जीवन के इतिहास में इस तारीख का बहुत अधिक महत्त्व है, क्योंकि इस तारीख को इफ़्फ़न के पिता बदली पर मुरादाबाद चले गए। इफ़्फ़न की दादी के मरने के थोड़े दिनों बाद ही इफ़्फ़न के पिता की बदली हुई थी। टोपी दादी के मरने के बाद तो अपनेआप को अकेला महसूस कर ही रहा था और अब इफ़्फ़न के चले जाने पर वह और भी अकेला हो गया था। इसीलिए टोपी ने दस अक्तूबर सन पैंतालीस को कसम खाई कि अब वह किसी भी ऐसे लड़के से कभी भी दोस्ती नहीं करेगा जिसके पिता कोई ऐसी नौकरी करते हो जिसमें बदली होती रहती हो।
उत्तर - दस अक्तूबर सन पैंतालीस का ऐसे तो कोई महत्त्व नहीं है परन्तु टोपी के जीवन के इतिहास में इस तारीख का बहुत अधिक महत्त्व है, क्योंकि इस तारीख को इफ़्फ़न के पिता बदली पर मुरादाबाद चले गए। इफ़्फ़न की दादी के मरने के थोड़े दिनों बाद ही इफ़्फ़न के पिता की बदली हुई थी। टोपी दादी के मरने के बाद तो अपनेआप को अकेला महसूस कर ही रहा था और अब इफ़्फ़न के चले जाने पर वह और भी अकेला हो गया था। इसीलिए टोपी ने दस अक्तूबर सन पैंतालीस को कसम खाई कि अब वह किसी भी ऐसे लड़के से कभी भी दोस्ती नहीं करेगा जिसके पिता कोई ऐसी नौकरी करते हो जिसमें बदली होती रहती हो।
प्रश्न 6 - टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात क्यों कही?
उत्तर - इफ़्फ़न के घर में टोपी का सबसे अधिक मेलमिलाप उसकी दादी से था। दादी की बोली उसे बहुत पसंद थी और टोपी की माँ की बोली भी वही थी। टोपी को इफ़्फ़न की दादी का हर एक शब्द शक़्कर की तरह मीठा लगता था। पके आम के रस को सूखाकर बनाई गई मोटी परत की तरह मज़ेदार लगता। तिल के बने व्यंजनों की तरह अच्छा लगता और वह दादी की डाँट सुन कर चुपचाप उनके पास चला आता। टोपी को अपनी दादी बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती थी। इसीलिए टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात कही।
उत्तर - इफ़्फ़न के घर में टोपी का सबसे अधिक मेलमिलाप उसकी दादी से था। दादी की बोली उसे बहुत पसंद थी और टोपी की माँ की बोली भी वही थी। टोपी को इफ़्फ़न की दादी का हर एक शब्द शक़्कर की तरह मीठा लगता था। पके आम के रस को सूखाकर बनाई गई मोटी परत की तरह मज़ेदार लगता। तिल के बने व्यंजनों की तरह अच्छा लगता और वह दादी की डाँट सुन कर चुपचाप उनके पास चला आता। टोपी को अपनी दादी बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती थी। इसीलिए टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात कही।
प्रश्न 7 - पूरे घर में इफ़्फ़न को अपनी दादी से ही विशेष स्नेह क्यों था?
उत्तर - इफ़्फ़न को अपनी दादी से बहुत ज्यादा प्यार था। प्यार तो उसे अपने अब्बू, अम्मी, बड़ी बहन और छोटी बहन नुज़हत से भी था परन्तु दादी से वह सबसे ज्यादा प्यार किया करता था। अम्मी तो कभी-कभार इफ़्फ़न को डाँट देती थी और कभी-कभी तो मार भी दिया करती थी। बड़ी बहन भी अम्मी की ही तरह कभी-कभी डाँटती और मारती थी। अब्बू भी कभी-कभार घर को न्यायालय समझकर अपना फैसला सुनाने लगते थे। नुजहत को जब भी मौका मिलता वह उसकी कापियों पर तस्वीरें बनाने लगती थी। बस एक दादी ही थी जिन्होंने कभी भी किसी बात पर उसका दिल नहीं दुखाया था। यही कारण था कि पूरे घर में इफ़्फ़न को अपनी दादी से ही विशेष स्नेह था।
उत्तर - इफ़्फ़न को अपनी दादी से बहुत ज्यादा प्यार था। प्यार तो उसे अपने अब्बू, अम्मी, बड़ी बहन और छोटी बहन नुज़हत से भी था परन्तु दादी से वह सबसे ज्यादा प्यार किया करता था। अम्मी तो कभी-कभार इफ़्फ़न को डाँट देती थी और कभी-कभी तो मार भी दिया करती थी। बड़ी बहन भी अम्मी की ही तरह कभी-कभी डाँटती और मारती थी। अब्बू भी कभी-कभार घर को न्यायालय समझकर अपना फैसला सुनाने लगते थे। नुजहत को जब भी मौका मिलता वह उसकी कापियों पर तस्वीरें बनाने लगती थी। बस एक दादी ही थी जिन्होंने कभी भी किसी बात पर उसका दिल नहीं दुखाया था। यही कारण था कि पूरे घर में इफ़्फ़न को अपनी दादी से ही विशेष स्नेह था।
प्रश्न 8 - इफ़्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा क्यों लगा?
उत्तर - टोपी और दादी में एक ऐसा सम्बन्ध हो चूका था जिसे शायद अगर इफ़्फ़न के दादा जीवित होते तो वह भी बिलकुल उसी तरह न समझ पाते जैसे टोपी के घरवाले न समझ पाए थे। दोनों अलग-अलग अधूरे थे। एक ने दूसरे को पूरा कर दिया था। दोनों ही प्यार के प्यासे थे और एक ने दूसरे की इस प्यास को बुझा दिया था। दोनों अपने-अपने घरों में अजनबी और भरे घर में अकेले थे क्योंकि दोनों को ही उनके घर में कोई समझने वाला नहीं था। दोनों ने एक दूसरे के अकेलापन को दूर कर दिया था। दादी जितना प्यार इफ़्फ़न से करती थी उतना ही टोपी से भी करती थी। दादी दोनों को ही कहानियाँ सुनाया करती थी। इफ़्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा इसलिए भी लगा क्योंकि टोपी इफ़्फ़न के घर में केवल दादी से ही मिलने जाया करता था।
उत्तर - टोपी और दादी में एक ऐसा सम्बन्ध हो चूका था जिसे शायद अगर इफ़्फ़न के दादा जीवित होते तो वह भी बिलकुल उसी तरह न समझ पाते जैसे टोपी के घरवाले न समझ पाए थे। दोनों अलग-अलग अधूरे थे। एक ने दूसरे को पूरा कर दिया था। दोनों ही प्यार के प्यासे थे और एक ने दूसरे की इस प्यास को बुझा दिया था। दोनों अपने-अपने घरों में अजनबी और भरे घर में अकेले थे क्योंकि दोनों को ही उनके घर में कोई समझने वाला नहीं था। दोनों ने एक दूसरे के अकेलापन को दूर कर दिया था। दादी जितना प्यार इफ़्फ़न से करती थी उतना ही टोपी से भी करती थी। दादी दोनों को ही कहानियाँ सुनाया करती थी। इफ़्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा इसलिए भी लगा क्योंकि टोपी इफ़्फ़न के घर में केवल दादी से ही मिलने जाया करता था।
ध्यान दीजिये:- 22 मई को मुहावरों की लघु परीक्षा होगी।
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