नमस्कार !
अभी तक हमने पढ़ा --
टोपीकी अपना नया कोट नौकरानी के बेटे को देने के कारण बहुत पिटाई हुई।
अब पढ़ेंगे -
पृष्ठ संख्या - ४२ -४३। यह कहानी इस लिंक से पढ़िए : http://ncertbooks. prashanthellina.com/class_10. Hindi.SanchayanBhag2/ch-3.pdf
- टोपी की पढ़ाई भी उसकी तरह उपेक्षित रही। वह दसवीं तक पहुँचते - पहुँचते दो बार फेल हुआ था।
- टोपी पढ़ने मेंहोशिआर था, लेकिन कोई उसे पढ़ने ही नहीं देता था।
- जब भी पढ़ने बैठता किसी न किसी को काम निकल आता था। छोटा भाई भैरव कोपियों के पन्नों से जहाज़ बना कर उड़ाता था।
- उसे एक बार टाइफाइड हो गया। तीसरे साल में जाकर पास हुआ, वह भी थर्ड डिवीज़न।
- उसके मित्र अगली कक्षा में निकल गए , विद्यालय में उसका सब मज़ाक उड़ाते, अध्यापक जब कभी कमज़ोर बच्चों का उदहारण देते तो टोपी का नाम सबसे ऊपर होता।
- विधालय में भी उसका कोई मित्र नहीं था, वह अकेला रह गया।
- तीसरे साल भी वह फेल हो गया , उसके पिताजी चुनाव में खड़े हुए थे जिसके कारण घर में पढाई का माहौल नहीं था। इसमें टोपी का कोई दोष नहीं था।
- उसकी परिस्थितियों को देख कर उसका थर्ड डिवीज़न में पास होना उसकी बड़ी उपलब्धि मानी गयी।
- अंत में दादी ने टोपी का मज़ाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन टोपी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
कक्षा कार्य
निम्नलिखित मुहावरों के वाक्य बनाइये :
- बरस पड़ना - एकदम से क्रोधित हो जाना
- ,दिल टूटना - निराश होना
- मुँह लगाना - बहुत स्वतंत्रता देना
- एक टाँग पर खड़े होना - पूरी लगन से काम करना
- दिल मसोसकर रहना - मन मारकर रह जाना
- ज़बान की नोक पर रखना - कड़वी बातें बोलना
- आसमान सिर पर उठाना - बहुत उत्पात / शोर करना
- होश ठिकाने आना - वास्तविकता का पता चलना
- गीली मिटटी का लौंदा होना - बहुत अधिक सीधा होना
- चकरा जाना - कुछ समझ न पाना
शब्द-अर्थ
सितम -अत्याचार
लोगन-लोग
गाउदी -बुद्धू
गृह कार्य
प्रश्न 9 - टोपी और इफ़्फ़न की दादी अलग-अलग मज़हब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। इस कथा के आलोक में अपने विचार लिखिए।
उत्तर - टोपी हिन्दू धर्म से था और इफ़्फ़न की दादी मुस्लिम थी। परन्तु टोपी और दादी का रिश्ता इतना अधिक अटूट था कि टोपी को इफ़्फ़न के घर जाने के लिए मार भी पड़ी थी परन्तु टोपी दादी से मिलने, उनकी कहानियाँ सुनाने और उनकी मीठी पूरबी बोली सुनने रोज इफ़्फ़न के घर जाता था। दादी रोज उसे कुछ-न-कुछ खाने को देती पर टोपी कभी नहीं खता था। उसे तो दादी का हर एक शब्द गुड़ की डली की तरह लगता था। टोपी और इफ़्फ़न की दादी अलग-अलग मज़हब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। दोनों एक दूसरे को खूब समझते थे।
उत्तर - टोपी हिन्दू धर्म से था और इफ़्फ़न की दादी मुस्लिम थी। परन्तु टोपी और दादी का रिश्ता इतना अधिक अटूट था कि टोपी को इफ़्फ़न के घर जाने के लिए मार भी पड़ी थी परन्तु टोपी दादी से मिलने, उनकी कहानियाँ सुनाने और उनकी मीठी पूरबी बोली सुनने रोज इफ़्फ़न के घर जाता था। दादी रोज उसे कुछ-न-कुछ खाने को देती पर टोपी कभी नहीं खता था। उसे तो दादी का हर एक शब्द गुड़ की डली की तरह लगता था। टोपी और इफ़्फ़न की दादी अलग-अलग मज़हब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। दोनों एक दूसरे को खूब समझते थे।
प्रश्न 10 - टोपी नवीं कक्षा में दो बार फेल हो गया। बताइए -
(क) ज़हीन होने के बावजूद भी कक्षा में दो बार फ़ेल होने के क्या कारण थे?
उत्तर - वह पढ़ाई में बहुत तेज़ था परन्तु उसे कोई पढ़ने ही नहीं देता था। जब भी टोपी पढ़ाई करने बैठता, तो कभी उसके बड़े भाई मुन्नी बाबू को कोई काम याद आ जाता या उसकी माँ को कोई ऐसी चीज़ मँगवानी पड़ जाती जो नौकरों से नहीं मँगवाई जा सकती थी। अगर ये सारी चीज़े न होती तो कभी उसका छोटा भाई भैरव उसकी कापियों के पन्नों को फाड़ कर उनके हवाई जहाज़ बना कर उड़ाने लग जाता। यह तो थी पहले साल की बात। दूसरे साल उसे टाइफ़ाइड हो गया था। जिसके कारण वह पढ़ाई नहीं कर पाया और दूसरी साल भी फेल हो गया।
(क) ज़हीन होने के बावजूद भी कक्षा में दो बार फ़ेल होने के क्या कारण थे?
उत्तर - वह पढ़ाई में बहुत तेज़ था परन्तु उसे कोई पढ़ने ही नहीं देता था। जब भी टोपी पढ़ाई करने बैठता, तो कभी उसके बड़े भाई मुन्नी बाबू को कोई काम याद आ जाता या उसकी माँ को कोई ऐसी चीज़ मँगवानी पड़ जाती जो नौकरों से नहीं मँगवाई जा सकती थी। अगर ये सारी चीज़े न होती तो कभी उसका छोटा भाई भैरव उसकी कापियों के पन्नों को फाड़ कर उनके हवाई जहाज़ बना कर उड़ाने लग जाता। यह तो थी पहले साल की बात। दूसरे साल उसे टाइफ़ाइड हो गया था। जिसके कारण वह पढ़ाई नहीं कर पाया और दूसरी साल भी फेल हो गया।
(ख) एक ही कक्षा में दो-दो बार बैठने से टोपी को किन भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर - मास्टरों ने उसकी ओर ध्यान देना बिलकुल ही छोड़ दिया था, कोई सवाल किया जाता और जवाब देने के लिए जब टोपी भी हाथ उठाता, तो कोई मास्टर उससे जवाब नहीं पूछता था। वहीद जो कक्षा का सबसे तेज़ लड़का था, उसने टोपी से कहा कि वह उन लोगों के साथ क्यों खेलता है। उसे तो आठवीं कक्षा वालों से दोस्ती करनी चाहिए क्योंकि वे लोग तो आगे दसवीं कक्षा में चले जाएँगे और टोपी को तो आठवीं वालों के साथ ही रहना है तो उनसे दोस्ती करना टोपी के लिए अच्छा होगा। टोपी ने किसी न किसी तरह एक साल को झेल लिया। परन्तु जब सन इक्यावन में भी उसे नवीं कक्षा में ही बैठना पड़ा तो वह बिलकुल गीली मिट्टी का पिंड हो गया, क्योंकि अब तो दसवीं में भी कोई उसका दोस्त नहीं रह गया था। जो विद्यार्थी सन उनचास में आठवीं कक्षा में थे वे अब दसवीं कक्षा में थे। जो सन उनचास में सातवीं कक्षा में थे, वे टोपी के साथ पहुँच गए थे। उन सभी के बीच में वह अच्छा-ख़ासा बूढ़ा दिखाई देने लगा था।
उत्तर - मास्टरों ने उसकी ओर ध्यान देना बिलकुल ही छोड़ दिया था, कोई सवाल किया जाता और जवाब देने के लिए जब टोपी भी हाथ उठाता, तो कोई मास्टर उससे जवाब नहीं पूछता था। वहीद जो कक्षा का सबसे तेज़ लड़का था, उसने टोपी से कहा कि वह उन लोगों के साथ क्यों खेलता है। उसे तो आठवीं कक्षा वालों से दोस्ती करनी चाहिए क्योंकि वे लोग तो आगे दसवीं कक्षा में चले जाएँगे और टोपी को तो आठवीं वालों के साथ ही रहना है तो उनसे दोस्ती करना टोपी के लिए अच्छा होगा। टोपी ने किसी न किसी तरह एक साल को झेल लिया। परन्तु जब सन इक्यावन में भी उसे नवीं कक्षा में ही बैठना पड़ा तो वह बिलकुल गीली मिट्टी का पिंड हो गया, क्योंकि अब तो दसवीं में भी कोई उसका दोस्त नहीं रह गया था। जो विद्यार्थी सन उनचास में आठवीं कक्षा में थे वे अब दसवीं कक्षा में थे। जो सन उनचास में सातवीं कक्षा में थे, वे टोपी के साथ पहुँच गए थे। उन सभी के बीच में वह अच्छा-ख़ासा बूढ़ा दिखाई देने लगा था।
(ग) टोपी की भावनात्मक परेशानियों को मद्देनज़र रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलाव सुझाइए।
उत्तर - बच्चे फ़ेल होने पर मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं। वे उसी कक्षा में अपने से छोटे विद्यार्थियों के साथ बैठने में शर्म महसूस करते हैं। अध्यापको को चाहिए की वे फेल हुए बच्चों पर भी उतना ही ध्यान दें, जितना दूसरे बच्चों पर दिया जाता है। बच्चों को केवल किताबी ज्ञान पर ही नहीं परखना चाहिए।
उत्तर - बच्चे फ़ेल होने पर मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं। वे उसी कक्षा में अपने से छोटे विद्यार्थियों के साथ बैठने में शर्म महसूस करते हैं। अध्यापको को चाहिए की वे फेल हुए बच्चों पर भी उतना ही ध्यान दें, जितना दूसरे बच्चों पर दिया जाता है। बच्चों को केवल किताबी ज्ञान पर ही नहीं परखना चाहिए।
प्रश्न 11 - इफ़्फ़न की दादी के मायके का घर कस्टोडियन में क्यों चला गया?
उत्तर - कस्टोडियन अर्थात सरकारी कब्ज़ा। इफ़्फ़न की दादी के मायके वाले जब कराची में रहने चले गए तो उनके पुराने घर की देखभाल के लिए कोई नहीं रह गया था। उनका उनके घर पर कोई मालिकाना हक़ भी नहीं रहा था। इसी कारण इफ़्फ़न की दादी के मायके का घर कस्टोडियन में चला गया।
उत्तर - कस्टोडियन अर्थात सरकारी कब्ज़ा। इफ़्फ़न की दादी के मायके वाले जब कराची में रहने चले गए तो उनके पुराने घर की देखभाल के लिए कोई नहीं रह गया था। उनका उनके घर पर कोई मालिकाना हक़ भी नहीं रहा था। इसी कारण इफ़्फ़न की दादी के मायके का घर कस्टोडियन में चला गया।
ध्यान दें:- 22 मई को होने वाली मुहावरों की परीक्षा की तैयारी कीजिये।
यह पाठ समाप्त हुआ। सभी प्रश्नों के उत्तर साहित्य कॉपी में कीजिये।